Friday, December 16, 2022

Hiraeth

 एक बाड़ा था, जहाँ पर होती हमारी गाय थी

एक पेड़ था शहतूत का,

और उधर कोने में माँ ने पालक लगाई थी।


एक झूला लगाते थे हर सावन वहां,

भाई बहन पापा को बुलाते थे।

हम एक दूसरे को धक्का देते थे,

पापा बहुत ज़ोर से झुलाते थे।

डर लगता था, पर पापा से

झूलना मुझे भी होता था।

मम्मी को पता था शायद,

वो हमेशा पापा को रोकने को आयी थी।

एक बाड़ा था, जहाँ पर होती हमारी गाय थी।।


उस पेड़ के शहतूत कभी पकते नहीं थे,

लगते थे, बढ़ते थे, पर गिर जाते थे।

ठीक उसी तरह जैसे भारत के खिलाड़ी,

हर सीरीज के फाइनल में हार जाते थे।

एक बार बोला बहन ने,

उसने एक पके हुए शहतूत की टहनी देखी थी।

और उसी साल ही भारत भी,

बीस साल बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची थी।

हिंदी दैनिक ने भी सभी पंद्रह खिलाडियों के नाम से,

एक लेटर जोड़ बनाया था "BEST OF LUCK INDIA"

और कहा था

कि ये केवल संयोग नहीं है,

टीवी पर महान ज्योतिष ने भी बोला,

भारत इस बार हार जाए, ऐसा कोई योग नहीं है।

जीतना तो तय था,

इसका था तो मुझे पूरा विश्वास।

पर फिर भी ढूंढ़ता था उस पके शहतूत की टहनी को,

ताकि बढ़ जाए थोड़ी और आस।

हर रोज़ खोजा मैंने, पर मिली नहीं वो टहनी मुझे,

और फाइनल मैच का मंजर आ ही गया था

मैंने फिर से खोजा टॉस के बिलकुल पहले

थोड़ी ऊंचाई पर आखिर वो गुच्छा नज़र आ ही गया था।

पर हार गया भारत कुछ ऐसे,

लगा मानो खिलाड़ी खेल सकते ही नहीं थे।

मालूम मुझे भी था,

उस पेड़ के शहतूत कभी पकते ही नहीं थे।

वहीं मायूस खड़ी थी मेरी बहन, जिसने ये अफवाह फैलाई थी,

एक बाड़ा था, जहाँ पर होती हमारी गाय थी।।


एक बछड़ा था उस गाय का,

उसे थोड़ा सा दूध पिला कर अंदर बाँध देते थे।

उसे शायद और भी पीना होता था,

पर उसका काट कर हम हमारा हिस्सा ले लेते थे।

कभी कभी खुल जाता था वो दोपहर में,

घड़े बाल्टी का पानी गिरा कर बाड़े को तालाब कर देता था।

दूध जो उसे रोज़ पीना होता था,

उसे छोड़ कर माँ की पालक खराब कर देता था।

बहुत चिल्लाते थे सब,

पर मैं समझता था कि शायद उसे गुस्सा बहुत ज्यादा था।

फिर बाद में पता चलता,

उस रोज़ मैंने ही उसे बाँधा था।

शायद बचपन से ही, नक्सली मेरी राय थी।

एक बाड़ा था, जहाँ पर होती हमारी गाय थी।।


घर से दो गली दूर था बाड़ा,

सोचता था कि काश हम यहीं पर रहते

फिर कुछ साल पहले हमने नया घर बनाया

जहाँ पर AC और मीठे पानी की सप्लाई थी

यह वही जगह थी,

जहाँ कभी एक बाड़ा था, जहाँ पर होती हमारी गाय थी।


-राजेश

2 comments:

  1. तो इतने सालों के बाद ख़ुराफ़ात निकल ही आई बाहर

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  2. एक बछड़ा था उस गाय का,

    उसे थोड़ा सा दूध पिला कर अंदर बाँध देते थे।

    उसे शायद और भी पीना होता था,

    पर उसका काट कर हम हमारा हिस्सा ले लेते थे।










    Wowww🔥🔥

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